A2Z सभी खबर सभी जिले की

टूटी सड़क, खुले बिजली तार, जलभराव जैसी लापरवाही से मृत्यु या चोट पर मुआवजे का अधिकार

📰 समृद्ध भारत
📍 जयपुर | दिनांक: 04 अगस्त 2025
✍️ रिपोर्ट – मांगीलाल विश्नोई, जिला संवाददाता – बाड़मेर

राज्य और स्थानीय निकायों की लापरवाही — जैसे टूटी सड़कें, खुले बिजली के तार, जलभराव, असुरक्षित भवन — यदि किसी नागरिक की जान ले लेती है या गंभीर चोट पहुंचाती है, तो उनके परिजनों को मुआवजे का कानूनी अधिकार है। यह अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और कानूनी लापरवाही के सिद्धांत पर आधारित है।

🧾 मुआवजे के लिए क्या करें?

पीड़ित पक्ष या परिजनों को संबंधित विभाग — जैसे नगर निगम, विद्युत विभाग, जलदाय विभाग आदि — को एक आवेदन देना होता है। आवेदन के साथ निम्न दस्तावेज संलग्न करें:

एफआईआर की प्रति

मृत्यु या चिकित्सकीय प्रमाण पत्र

घटनास्थल की तस्वीरें

वैध वारिस प्रमाण पत्र

यदि संबंधित विभाग समय पर मुआवजा नहीं देता, या नकारता है, तो पीड़ित पक्ष सिविल कोर्ट में दावा कर सकता है अथवा अनुच्छेद 226 के अंतर्गत हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर न्याय की मांग कर सकता है।

⚖️ न्यायालयों की स्पष्ट टिप्पणी

भारत के उच्च न्यायालयों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि जब सरकारी लापरवाही से किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो राज्य और संबंधित अधिकारी उत्तरदायी माने जाते हैं।

💰 कितना मिलता है मुआवजा?

सामान्यतः ऐसे मामलों में न्यायालय या विभाग 2 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक तक का मुआवजा प्रदान करते हैं। यह राशि घटना की गंभीरता, हानि की प्रकृति और परिस्थिति के अनुसार तय होती है।

📌 कानूनी सलाह

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल के अनुसार, “हर नागरिक को यह जानना चाहिए कि सरकारी लापरवाही की कीमत उसकी जान या चोट नहीं होनी चाहिए — उसके बदले न्याय और मुआवजा दोनों मिलना चाहिए।”

📌 यह रिपोर्ट जनहित में प्रकाशित की जा रही है। यदि आपके क्षेत्र में ऐसी कोई लापरवाही हुई है, तो अधिकारपूर्वक मुआवजे की मांग करें।
📞 संपर्क करें – समृद्ध भारत बाड़मेर संवाददाता 7424929297

Back to top button
error: Content is protected !!